
6. बपतिस्मा के बाद का प्रलोभन #२
लूका ४:५-१३, समानांतर मत्ती ४:५-११
मॉन्ट्रियल, ८ अप्रैल, १९७९
आज हम यीशु के प्रलोभन का अध्ययन ज़ारी रखते हुए, इसके अर्थ की गहराई में जाएंगे। पिछले हफ्ते मैंने बताया कि यीशु के बपतिस्मे के ठीक बाद, वास्तव में आत्मा से अभिषेक किए जाने के ठीक बाद, उनकी परीक्षा हुई थी। पूरे विवरण में, शैतान के हमले की युक्तियाँ, हमारे अवलोकन के लिए खुले आम दिखाए गए हैं। उदाहरण के लिए, जैसा कि हमने देखा, देह वह माध्यम है जिसके द्वारा शैतान हमारे हृदय पर प्रभाव डालता है, हमारी आवश्यकताओं और इच्छाओं को दिखाकर लुभाते हुए, जिनमें वे आवश्यकताएँ भी शामिल हैं जो वैध हैं जैसेकि भूख। फिर भी शैतान हमारे आत्मिक विनाश को लाने के उद्देश्य से उन्हें विकृत कर ही लेता है ।
प्रलोभन के तीन मूलभूत सिद्धांत
आज हम तीन सिद्धांतों में से दूसरे को देखेंगे, जिसके द्वारा शैतान हम पर आक्रमण करता है। लेकिन पहले मुझे यह उल्लेख करना होगा कि प्रलोभन का वृत्तान्त बहुत गहरा है, और इन अध्ययनों में हम जो कर रहे हैं वह तीन मूलभूत सिद्धांतों को देखने से ज्यादा कुछ नहीं कर रहे है। इस वृत्तान्त में और गहरे अर्थ हैं जिन पर हम अभी ध्यान नहीं देंगे। इसलिए मैं आपको यह विचार नहीं देना चाहता कि जब हम यीशु के प्रलोभन के इस अध्ययन को समाप्त कर लेंगे, तब हम इसे पूरी तरह से समझ चुके होंगे। हम केवल तीन मौलिक सिद्धांत देख रहे हैं। जैसे-जैसे आप मसीही जीवन में आगे बढ़ेंगे, और भी अधिक गहराइयाँ हैं जिन्हें आपको खोजना है।
पिछले सप्ताह हमने लूका अध्याय ४ के पद् १ से ४ को देखा। आज हम पद् ५ से १३ तक ज़ारी रखते हैं:
५ तब शैतान उसे ले गया और उसको पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए। ६ और उस से कहा; मैं यह सब अधिकार, और इन का वैभव तुझे दूँगा, क्योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूँ, उसी को दे देता हूँ। ७ इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा। ८ यीशु ने उसे उत्तर दिया; लिखा है; कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर; और केवल उसी की उपासना कर। ९ तब उसने उसे यरूशलेम में ले जा कर मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उस से कहा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहाँ से नीचे गिरा दे। १० क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें। ११ और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पांव में पत्थर से ठेस लगे। १२ यीशु ने उसको उत्तर दिया; यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना। १३ जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।। (लूका ४:५-१३)
यह दिलचस्प है कि शैतान और यीशु दोनों युद्ध में पवित्रशास्त्र का उपयोग करते हैं। पहले और दूसरे प्रलोभन में, यीशु ने "यह लिखा है" (पद्य ४,८) परिचयात्मक शब्दों के साथ, पवित्रशास्त्र को उद्धृत करते हुए शैतान के हमलों को रद्द किया। शैतान तब, पवित्रशास्त्र के ठीक उन्हीं शब्दों के साथ, "यह लिखा है" (पद् १०), जवाब में उद्धृत करता है, इस बार भजन संहिता ९१:११-१२ से, और वो भी बिलकुल सटीक। तब यीशु, एक उलटी चाल में, व्यवस्थाविवरण ६:१६ से उद्धरण देते हैं जिसमें मूसा इस्राएलियों से कहते हैं, "तुम अपने परमेश्वर यहोवा की परीक्षा न करना।"
शैतान का मौलिक प्रलोभन: अपनी इच्छा अनुसार करो
पिछले हफ्ते हमने देखा कि पहली तरह का प्रलोभन हमारी भौतिक जरूरतों और इच्छाओं, यहाँ तक कि वैध जरूरतों की पूर्ति की अपरिष्कृत मांग है। लेकिन जैसे-जैसे प्रलोभन की कहानी आगे बढ़ती है, शैतान अपनी चालों को परिशोधित बनाता है। और उसके पास निश्चित ही चुनने के लिए बहुत हैं, उसके शस्त्रागार में।
इससे पहले कि हम प्रलोभन के दूसरे सिद्धांत की जाँच करें, आइए हम पहले शैतान की मूल योजना को समझ लें। हालाँकि शैतान इसे स्पष्ट रूप से नहीं बताता है, उसका मूल सुझाव है: “अपना मन पसंद करो। परमेश्वर क्या कहते हैं इसकी परवाह मत करो। क्या परमेश्वर ने ऐसा कहा भी है? नंबर एक की परवाह करो, और वो हो स्वयं तुम। जो मायने रखता है वह है ‘स्वयं’, ‘अहंकार’। अपनी देखभाल खुद करना, क्योंकि हो सकता है कि परमेश्वर हमेशा तुम्हारी देखभाल न करे।”
यह सोचने का तरीका ही प्रसिद्ध कहावत का आधार है, जो कहता है, "परमेश्वर उनकी देखभाल करते हैं जो अपना ख्याल खुद रखते हैं।" इससे अधिक शैतानी कथन नरक से कभी उत्पन्न नहीं हुआ है। यह उचित लगता है, है ना? आप यह उम्मीद नहीं करेंगे कि परमेश्वर आपकी देखभाल करेंगे यदि आप अपनी देखभाल स्वयं नहीं करेंगे। क्या आप इसके तर्क को तोड़ सकते हैं? इस कथन ने हमें फुसलाया है और इसे विश्वास करने में मजबूर कर दिया। हम सोचते हैं कि परमेश्वर उनकी देखभाल करते हैं जो खुद की देखभाल करते हैं क्योंकि यह तर्क, अच्छी तरह से समझ में आती है। शैतान चाहेगा कि हम ठीक ऐसा ही सोचें।
उस आदमी को देखो, जो परमेश्वर की सेवा करने के लिए अपना करियर छोड़ देता है। अपने दिल में आप उससे कहते हैं, "मित्र, आप अपना ख्याल नहीं रख रहे हैं। आप इस तथ्य को याद नहीं कर रहे हैं कि परमेश्वर उनकी देखभाल करते हैं जो अपना ख्याल रखते हैं। यदि आप अपनी देखभाल नहीं करेंगे, तो आप परमेश्वर से आपकी देखभाल की अपेक्षा क्यों करेंगे?"
अजीब है काफी, मैंने ईसाइयों को यह कहते सुना है, "परमेश्वर उनकी देखभाल करते हैं जो खुद की देखभाल करते हैं," जैसे कि यह बाइबल से आया हो, या एक सामान्य ज्ञान तथ्य हो, जिसे हर ईसाई को जानना चाहिए हो।
निश्चित यह सामान्य बुद्धि है। लेकिन यह शारीरिक मनुष्य का सामान्य ज्ञान है जो इस प्रकार तर्क देता है: यदि आप अपना ख्याल रखते हैं, तो परमेश्वर आपकी देखभाल करेंगे। और यही इसे इतना अद्भुत बना देता है। इस तरह के आश्वासन के साथ, आपको और क्या चाहिए? एक ईसाई होने का उद्देश्य, यह ही नहीं की आप अपना ख्याल खुद रखते हैं बल्कि, परमेश्वर आपकी देखभाल करते हैं। यह उस तरह का आश्वासन है जिसकी आपको प्रतिस्पर्धी दुनिया में आवश्यकता है। परमेश्वर आपकी सेवा करने के लिए हैं, आप परमेश्वर की सेवा करने नहीं। यह कितना अद्भुत है कि परमेश्वर, प्रभु यीशु को हमारे पास भेजते हैं! यीशु हमारे पैर धोते हैं और हम अपने पैर धोते हैं, इसलिए वे दोगुने धोए जाते हैं! कौन परवाह करता है कि यीशु के पैर धोए गए है की नहीं, जब तक मेरे अपने पैर धोए जाते हैं, और वो भी स्वयं यीशु से - उनसे कम कोई नहीं चलेगा!
सोचने के इस तरीके को, ए.डब्ल्यू. टोज़र ‘दोगुना बीमा’ कहते हैं। ईसाई का दोगुना बीमा होता है: आप अपने आप को बचाते हैं, और परमेश्वर आपको बचाते हैं । यह सोच शारीरिक मनुष्य को पूरी तरह तार्किक लगता है।
पहले आप ईसाई बने ही क्यों? यीशु के लहू से उद्धार पाने के लिए? हमारी सोच में, आप परमेश्वर के लिए कुछ करते हैं या नहीं यह मुख्य बात नहीं है, हालांकि आप अपने फुर्सत के समय में परमेश्वर के लिए कुछ करने के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन ज्यादातर समय, परमेश्वर आपके लिए सब कुछ करने के लिए हैं।
इसे ही मैं शैतान का मानव-केंद्रित धर्म कहता हूँ। यदि आप कभी किसी को यह कहते हुए सुनेंगे कि, "परमेश्वर उनकी देखभाल करता है जो अपना ख्याल रखते हैं," तो आप उसे बता सकते हैं कि यह सीधे शैतान की ओर से आता है। मैंने कई अविवेकी ईसाइयों को इसे पूरी तरह निगलते हुए देखा है, जो आत्मिक अंतर्दृष्टि की कमी के कारण इस शैतानी तर्क को पहचान नहीं सके।
दूसरा प्रलोभन: एक उच्चतम अनुभव
आइए अब हम दूसरे प्रलोभन को देखें। यदि आप खुद की देखभाल कर रहे हो, तो कठिनाई के समय आप इसे किस तरह करेंगे? इसका शीघ्र उत्तर है: सबसे आसान रास्ता चुनो, सबसे कम प्रतिरोध का रास्ता! यदि आपकी प्राथमिकता स्वयं की भलाई है, तो आप अपने लिए बातों को कठिन नहीं बनाएंगे, है ना? इसलिए सबसे कम प्रतिरोध का रास्ता चुनो, सकेत रास्ते के बजाय आसान रास्ता चुनो। भीड़ में शामिल हों क्योंकि कठिन और सकेत रास्ता अल्पसंख्यकों के लिए है।
लूका ४:५ में, आसान रास्ता अपनाना ही परीक्षा है। मैं आपको इस पद् के बारे में कुछ पृष्ठभूमि की जानकारी देता हूँ, जो कहता है, "५ तब शैतान उसे ले गया (एक ऊंचे स्थान पर) और उसको पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए।" ये राज्य सिर्फ राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि इस दुनिया की शक्तियॉं और प्राधिकारियाँ हैं।
शैतान, यीशु को यूरोप का निर्देशित दौरा नहीं दे रहा था, जिसके बाद कोई कह सके कि, "मैंने बारह दिनों में दस यूरोपीय देशों का दौरा किया!" सिर्फ एक दिन में जर्मनी को देखने की कल्पना कीजिए। यह संभव है। मैंने एक दिन में, सुबह से शाम तक, जर्मनी की एक सीमा से दूसरी सीमा तक यात्रा किया है। यह थकाऊ है लेकिन मुमकिन है।
लेकिन शैतान यीशु को राष्ट्रों का दौरा नहीं दे रहा था। वाक्यांश "पल भर में" (पद् ५) को "एक झलक में" या "एक दर्शन में" के रूप में समझना चाहिए। यहाँ एक दर्शन दिया गया है, निर्देशित दौरा नहीं। समानांतर पद्, मत्ती ४:८, कहता है कि शैतान यीशु को एक "बहुत ऊँचे पहाड़" पर ले गया, उन्हें एक उच्चतम शिखरवाली अनुभव देते हुए।
शैतान आपको एक उत्थानशील आत्मिक अनुभव, एक ऊंचे स्थान से एक श्रेष्ठ दृष्टि, दे सकता है। और यह कितना शानदार दर्शन है, संसार के वैभव का। लेकिन मैं उन लोगों से कहता हूँ जिन्होंने नया बपतिस्मा लिया है: शैतान की तरफ़ से आने वाले आत्मिक दर्शनों से सावधान रहें। यह मत सोचो कि हर पहाड़ की चोटी का उच्चतम अनुभव, परमेश्वर की ओर से आता है।
जब कोई ईसाई सम्मेलन से पहाड़ की चोटी के अनुभव के साथ बाहर आता है, तो मुझे यकीन नहीं होता कि यह हमेशा परमेश्वर की तरफ़ से है। इसका कारण यह है कि कई लोगों के विषय में, सम्मेलन के बाद एक सप्ताह के भीतर, वह व्यक्ति आध्यात्मिक रूप में नीचे की ओर चक्कर मारता है, यहाँ तक कि अवसाद में भी पड़ जाता है। जब कोई आत्मिक अनुभव आपको इतने कम समय में निराश करता हो, तो संभाव नहीं है कि वह परमेश्वर की ओर से होगा। शैतान आपको नीचे गिराने के लिए ही ऊपर उठाता है। इसलिए मैं उच्चतर अनुभवों से सावधान रहता हूँ। हर आत्मिक अनुभव के समीप सावधानी के साथ आयें, खासकर अगर यह तुरंत उत्थान प्रदान करे।
इसी वजह से मुझे उन लोगों की चिंता है जो अन्यभाषा बोलने पर ज़ोर देते हैं। जैसा कि मैंने कई बार कहा है, मैं अन्यभाषा के खिलाफ नहीं हूँ। फिर भी यह मुझे चिंतित करता है कि लोग अन्यभाषा की तलाश, परमेश्वर की बेहतर सेवा करने के लिए नहीं, बल्कि एक उत्थान आत्मिक अनुभव प्राप्त करने के लिए करते हैं। और वे निश्चित शैतान से एक ऐसा अनुभव प्राप्त करेंगे। इन शब्दों पर ध्यान दें, "शैतान, यीशु को ऊँचा ले गया।" क्या आप एक उत्थानात्मक अनुभव चाहते हैं? शैतान आपको यह देगा। लेकिन इन अनुभवों से सावधान रहें, जैसेकि एक चंगाई के सम्मेलन में आनंद और उल्लास। जैसा कि मैंने आपके साथ साझा किया है, मैं चंगाई के खिलाफ नहीं हूँ। परमेश्वर ने छोटे प्रकार में मुझे चंगाई में इस्तेमाल किया है। लेकिन आत्मिक उत्थान की तलाश से सावधान रहें। यह खतरनाक है! शैतान आपको उठाने के लिए तैयार है, और आप असली और नकली में फर्क नहीं बता पाएँगे। सभी भाषाएँ या चंगाई परमेश्वर की ओर से नहीं हैं।
शैतान यीशु को संसार के राज्यों का दर्शन देता है। यह एक दर्शन है जो शैतान की ओर से आता है, इसलिए जागरूक रहें कि सभी दर्शन परमेश्वर की ओर से नहीं होते हैं। कुछ परमेश्वर से हैं, कुछ उनसे नहीं हैं। परमेश्वर की तरफ़ से दर्शन पाना अद्भुत है, लेकिन ऐसा दर्शन, सांसारिक महिमा के बजाय परमेश्वर की महिमा दिखाएगा। इसलिए दर्शन के सार का प्रभेद कीजिए। क्या आपके माम्स को यह भाता है, या क्या यह आपको परमेश्वर के साथ आत्मिक समगत में नज़दीक ले आता है?
क्या आप दोनों में अंतर बता सकते हैं? यदि आप भावनात्मक और अनियंत्रित रूप में उत्तेजित हो जाते हैं, तो यह परमेश्वर की ओर से नहीं है, क्योंकि यदि आपका आत्मिक उठाव हुआ है, तो एक गहरी शांति होगी जो एक आत्मिक उत्थान का एक निश्चित संकेत है।
उन सामूहिक सम्मेलनों से सावधान रहें जो संगीत और गायक-दल का उपयोग करके आपकी भावनाओं पर खेलते हैं। भले ही हम जानते हैं कि ऐसे कैसे किया जाता है, हम ऐसी तकनीकों का उपयोग नहीं करते हैं, क्योंकि वे अक्सर आत्मिक परिणाम के बजाय, शैतानी परिणाम उत्पन्न करते हैं। हम समूह-सम्मेलन में आसानी से बहा लिए जा सकते है। मनोवैज्ञानिक "सामूहिक भीड़" प्रभाव से परिचित हैं जो जज़्बाती भावनाओं को उत्तेजित करता है। लेकिन एक बुद्धिमान उपदेशक इन तकनीकों का उपयोग करने से परहेज करता है क्योंकि, यदि आप किसी व्यक्ति को उसके मांस द्वारा ऊपर उठाएंगे, तो वह आत्मिक तौर पर गिर जाएगा।
लेकिन एक वास्तविक आत्मिक उत्थान के लिए भावनाओं को भड़काने पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं है। जब परमेश्वर का आत्मा आपको ऊपर उठाता है, तो एक गहरा आंतरिक शांति होती है, न कि अनियंत्रित कांपना या रोना। मैंने लोगों को भयानक भावनात्मक अवस्था में रोते और कांपते देखा है। यह आवश्यक नहीं कि यह परमेश्वर की ओर से हो, क्योंकि यदि आत्मा आपको दोषी ठहराता है, तो परिणाम आत्मिक होते हैं: नीरवता, टूटेपन और शांत रोना, न कि अनियंत्रित कांपने और रोना। मांस और आत्मा के बीच, दुनिया और परमेश्वर के बीच भेद जानिए। यशायाह ने जो दर्शन देखा, वह परमेश्वर का दर्शन है, न कि संसार की महिमा का दर्शन, जो आपको केवल गुमराह कर देगा।
जब भी आप किसी बड़े सम्मेलन में हो (और हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी बड़े सम्मेलन गलत हैं), तो सावधान रहें ताकि कोई भी, बड़े गायक-मंडलियों और भावुक संगीत के साथ आपकी भावनाओं पर असर न करे। इसके बजाय, परमेश्वर के करीब रहें, और उनके सामने अपनी आत्मा को शांत करें।
चीन में, मैं अपने माध्यमिक विद्यालय के मार्चिंग बैंड में झंडा लेकर चलता था। वाह! क्या आपने कभी लाखों लोगों को मार्च करते देखा है? यह प्रभावशाली और रोमांचक है! सामूहिक प्रभाव बहुत शक्तिशाली है। यदि एक व्यक्ति नारा लगाता है, तो पूरी भीड़ उत्तर में चीखता है। लेकिन जब यह तमाम हो जाता है और वे घर वापस जाते हैं, तो वे सोचने लगते हैं, "ये सब क्या था?"
मुझे यह देखकर दुख होता है कि ईसाई इन तकनीकों का उपयोग करते हैं, यह सोचकर कि यह परमेश्वर की सेवा करने का एक तरीका है। लेकिन शैतानी या सांसारिक तकनीकों का उपयोग करके परमेश्वर की सेवा नहीं की जाती है। सामूहिक सम्मेलनों का एक सामान्य परिणाम, उच्च गिरावट दर है। बहुत, जो मसीह के लिए सामूहिक सम्मेलन में निर्णय लेते हैं, वे अपने निर्णयों पर टिके नहीं रहते हैं। आंकड़ों से पता चला है कि पहले वर्ष के भीतर ८०% से अधिक गिरावट होती है। क्या आप यही परिणाम चाहते हैं? कागज़ पर मसीह के लिए निर्णयों की संख्या प्रभावशाली दिखती है, लेकिन कितने जीवित बचेंगे, एक साल तक? पांच साल तक?
आत्मिक युद्ध की स्वरूप को समझिए। जानिए दुश्मन की रणनीति और वह कैसे मांस पर काम करता है। सतही आत्मिक अनुभवों की तलाश न करें।
मुझे उस पात्र के रूप में स्वीकार करो जिसने तुम्हें यह सब दिया है
लूका ४:६-७ में, शैतान यीशु को "यह सारा अधिकार और उनकी महिमा" देने की पेशकश करता है, लेकिन एक शर्त के तहत: "यदि तुम मेरी उपासना करोगे, तो यह सब तुम्हारा होगा।"
शैतान मूर्ख नहीं है। वह दुनिया में यीशु के उद्देश्य से अवगत है: "परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।" (१ यूहन्ना ३:८)। यह बात यीशु भी जानते हैं: "परन्तु मैं इसी कारण इस घड़ी को पहुंचा हूं" (यूहन्ना १२:२७), वो है, अपने प्राण देने के द्वारा शैतान के कामों का विनाश करना।
हम शैतान और यीशु के बीच एक चर्चा की कल्पना कर सकते हैं। शैतान उनसे कहता है: “आप और मैं जानते हैं कि यह किस बारे में है। आप मुझसे लड़ने और संसार में मेरी शक्ति का विनाश करने आए हैं। लेकिन आप यह भी जानते हैं कि मैं इसे लेटे लेटे नहीं लूंगा। मैं लड़ूंगा, और हम दोनों को कष्ट भुगतना पड़ेगा। आपको पीड़ा होगी क्योंकि मैं आपसे लड़ने जा रहा हूँ। मुझे पीड़ा होगी क्योंकि आपके पास आत्मिक शक्ति है। तो चलो हम एक सौदा कर लेते हैं। इतने दिन दुनिया के सभी राज्यों पर मेरा अधिकार चल रहा है। लेकिन जब एक बार मैं यह सब आपको दे दूंगा, तब मेरे पास ये नहीं रहेंगे। बिना किसी लड़ाई के, एक छोटी सी शर्त पर, मैं ऐसा कर दूंगा: और वो है कि आप स्वीकार करें कि आपने मुझसे यह सारा अधिकार प्राप्त किया है। मेरे राजत्व को स्वीकार करो और मुझे प्रणाम करो!”
"यदि तुम मेरी उपासना करोगे" - हमें इन शब्दों के अर्थ को समझने की आवश्यकता है, क्योंकि कई ईसाई इसे शैतान की ईश्वरीय उपासना के अर्थ में गलत समझते हैं। लेकिन कुछ बाइबलों के अनुवाद में लूका ४:७ के लिए "मेरे सामने झुकना" या "मुझे प्रणाम करना" है।
यह सोचना हास्यास्पद है कि यीशु, शैतान की उपासना करेंगे। यहाँ तक कि नवी ईसाई भी कभी नहीं सोचेंगे कि एक धार्मिक यहूदी, विशेष रूप से यीशु, शैतान को परमेश्वर के रूप में पूजा करेंगे। और शैतान इतना मूर्ख नहीं है कि यह सोचे। यदि उसने यीशु को परमेश्वर के रूप में उसकी उपासना करवाने की कोशिश की होती, तो यह यीशु के लिए एक परीक्षा ही नहीं होती।
जिस शब्द का अनुवाद यहाँ "उपासना" के रूप में किया गया है, उसका उपयोग बाइबल में कैसे किया जाता है, यह जानना महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ, शैतान को परमेश्वर के रूप में उपासना करना नहीं है, क्योंकि यीशु ऐसा कभी नहीं करते। नाममात्र के ईसाई भी ऐसा करने से इंकार कर देंगे अगर उन्हें तभी के तभी ऐसा करने कहा गया, तो परमेश्वर के पुत्र तो बिलकुल ही नहीं करते। शैतान, परमेश्वर के रूप में, यीशु को उसकी पूजा करने के लिए नहीं कह रहा है, बल्कि उसे इस दुनिया के राजा के रूप में सम्मानित करने के लिए कह रहा है।
वास्तव में यहाँ जिस यूनानी शब्द ‘प्रोस्किनिओ’’ का अनुवाद "उपासना" के रूप में किया गया है, जिसका प्राथमिक अर्थ उपासना नहीं है, केवल एक द्वितीयक और व्युत्पन्न अर्थ में है। इसका प्राथमिक अर्थ, श्रद्धा, सम्मान, या श्रद्धांजलि की पेशकश है, जिसे किसी भी मानक ग्रीक-अंग्रेज़ी शब्दकोष, जैसे बी.डी.ए.जी या थेयर, में देखा जा सकता है। इन दो शब्दकोशों में प्रोस्किनिओ की परिभाषा, वर्तमान पुस्तक के परिशिष्ट २ में दी गई है, और दोनों में केवल एक द्वितीयक परिभाषा के रूप में "उपासना" है।
‘प्रोस्किनिओ’’ शब्द का प्रयोग मत्ती २:२ में उन ज्योतिषी या बुद्धिमानों के लिए किया गया है जो शिशु यीशु को श्रद्धांजलि देते हैं, उन्हें परमेश्वर के रूप में नहीं बल्कि यहूदियों के राजा के रूप में सम्मानित करते हुए।
जो भी हो, शैतान आपसे कुछ ऐसा करने के लिए नहीं कहेगा जो आप कभी नहीं करेंगे। नाममात्र का ईसाई भी शैतान को परमेश्वर के रूप में उपासना नहीं करेगा। यह अपरक्राम्य है। नहीं, शैतान केवल यीशु को राजा के रूप में सम्मानित करने के लिए कह रहा है। हालाँकि यीशु ने स्वीकार किया है कि इस संसार में शैतान के पास शाही अधिकार है, लेकिन वे शैतान को अपने राजा के रूप में सम्मान नहीं करेंगे।
शैतान एक महत्वपूर्ण अर्थ में राजा है। यीशु उसे "इस संसार के शासक" या "इस संसार के राजकुमार" के रूप में बोलते हैं (यूहन्ना १२:३१; १४:३०; १६:११)। "राजकुमार" के लिए यूनानी शब्द (आर्कोन) का व्यापक अर्थ, एक शासक भी होता है। मत्ती १२:२६ में यीशु, शैतान के राज्य और शाही शक्ति के बारे में बात करते हैं, दोनों जो, पद् २८ में वर्णित परमेश्वर की शाही बल के विरोध में खड़े हैं ("परमेश्वर का राज्य तुम पर आ गया है")।
आसान रास्ता चुनने का प्रलोभन
शैतान, यीशु से कह रहा है, “चूंकि आप ने स्वीकार किया है कि मैं इस जगत का स्वामी हूँ, तो मैं आप से सिर्फ यही माँग रहा हूँ कि मेरे आगे घुटने टेककर मुझे प्रणाम करें, और राजा के रूप में मेरा आदर करें। तब मैं सब कुछ आपको सौंप दूँगा। आपको और मुझे युद्ध नहीं करना पड़ेगा, और आपको क्रूस पर नहीं जाना पड़ेगा। यदि आप संसार के राज्य चाहते हो, तो मैं उन्हें आपको दूँगा। आसान रास्ता चुनें। मैं बहुत कुछ नहीं माँग रहा हूँ,बस आप मुझे राजा के रूप में सम्मानित करो। ”
कोई यह स्वीकार कर सकता है कि एक व्यक्ति राजा है, लेकिन उसे राजा का सम्मान दिए बगैर। शैतान कह रहा है, “राजा के रूप में मेरा आदर करो, और मैं आपको जगत के राज्य दूँगा। तब मैं वहॉँ से खिसक जाऊँगा, क्योंकि एक बार जो आपको राज्य सौंप दिया, तो वे अब मेरे नहीं रहेंगे।”
यह एक खतरनाक तरह का कपटी पेशकश है। इसके कई निहितार्थों में बिना गए, जो आत्मिक युद्ध में और अधिक जटिल हो जाएंगे, यहाँ पर्याप्त होगा कि मूल सिद्धांत को पहचान लें: आसान तरीका चुन लो। इसके लिए बस एक छोटा सा समझौता करना होता है।
इस सूक्ष्म युक्ति को मैंने ईसाइयों पर बार-बार इस्तेमाल किए जाते हुए देखा है। उदाहरण के लिए, मैंने ऐसे लोगों को देखा है जो परमेश्वर की सेवा करना चाहते हैं, परमेश्वर के लिए जीना चाहते हैं और परमेश्वर की पूर्ण-समय सेवा में प्रवेश करना चाहते हैं। तब दो कार्य में से एक आमतौर पर होता है। परिवार या तो सीधे टकराव में उसकी योजनाओं का विरोध करता है, या वे नरम तरीके के मार्ग को अपनाते हैं जो आमतौर पर अधिक प्रभावी होता है। वे कहेंगे, "हमें कोई एतराज़ नहीं है," जब वास्तव में उनके दिलों में तीव्र विरोध करते हैं। फिर वे एक सौदा करते हैं: “हम तुम्हारे साथ झगड़ा नहीं करेंगे। इसलिए बाइबल कॉलेज में आपकी पढ़ाई का खर्च हम उठाना चाहेंगे।”
मैंने कई ईसाइयों को सीधे उस जाल में चलके फँसते हुए देखा है, और आनन्दित होकर बाहर आते हैं, "हालेलुय्याह! मेरे परिवार को आपत्ति नहीं है। वे मेरे बाइबल कॉलेज के ख़र्चों का भुगतान भी करेंगे।” लेकिन इतनी तेज़ी से हलेलुजाह मत कहो, क्योंकि तुम अभी-अभी एक जाल में फँस गए हो। यदि आप बुद्धिमान होते, तो आप उन से एक फूटी कौड़ी भी स्वीकार नहीं करते। लेकिन चूंकि आपने उनका समर्थन स्वीकार कर लिया है, अब आप उनकी चपेट में हैं। आप गैर-ईसाइयों के प्रति अपने धर्मवैज्ञानिक प्रशिक्षण के ऋणी होंगे, भले ही वे आपके परिवार के सदस्य हो।
मैंने बहुत से अविवेकी ईसाइयों को उस जाल में फँसते हुए देखा है, जिस कारण वे मिटा दिए गए हैं। दुश्मन या विपक्ष से आप, कोई भी चीज़ बिना उच्च ब्याज चुकाए नहीं पा सकते। । इसलिए सावधान रहें जब शैतान सहानुभूतिपूर्ण तरीके से आपके पास आए। यह सबसे भयावह है! मैं आमने-सामने के हमले से नहीं डरता, लेकिन जो मुझे डराता है, वह है नरम हेरफेर जिसे पहचानना मुश्किल हो सकता है।
दुश्मन ने मुझ पर कई बार यह कोशिश की है। लिवरपूल में, एक महिला ने मेरा ज़बरदस्ती से सामना किया। यदि आप किसी परमेश्वर के जन का विरोध करेंगे, तो आप जल्द ही जान लेंगे कि परमेश्वर की शक्ति आपसे निपटने के लिए पर्याप्त से अधिक है। जब उसने मुझसे संपर्क किया, तो उसने सोचा कि वह मुझे ज़बरदस्त ताकत से कुचल सकती है, लेकिन केवल खुद को कुचले जाते हुए पाई।
उसने अपनी रणनीति बदलकर, मुझे पैसों से खरीदने की कोशिश की: “चलो दोस्त बनें। हम अब और नहीं लड़ेंगे। मैं तुम्हारे लिए एक चर्च की इमारत मुफ्त में खरीद दूंगी!” मुझे उसके नरम रवैये पर शक था, तो मैंने कहा, "क्या कोई प्रतिबंधात्मक शर्तें जुड़े हुए हैं?"
"कोई शर्तें जुड़े नहीं हैं।"
"कोई नहीं? सचमुच?"
"कुछ भी नहीं! भवन तुम्हारा है। आप यह ले सकते हैं।"
आपको कैसे लगेगा अगर चर्च की इमारत एक थाली में आपको सौंप दिया जाए? सबसे बढ़कर, उसके कोमल हमले ने मुझे चिंतित बना दिया। तो मैंने इसके बारे में प्रार्थना की और उसके पास वापस आया, "नहीं, धन्यवाद। मुझे भवन नहीं चाहिए।"
"लेकिन यह मुफ़्त है जिसमें कोई प्रतिबंधात्मक शर्तें जुड़े नहीं हैं। हम एक वकील रख लेंगे और दस्तख़त करके आप को दिलवा देंगे।”
"जी नहीं, धन्यवाद।"
"आपको ये इमारत पसंद नहीं है? किसी और देख लें?"
"नहीं धन्यवाद, मुझे भवन की आवश्यकता नहीं है।"
"अगर आपको यह इमारत पसंद नहीं है, तो हम इसे तुड़वाकर एक नया वाला निर्माण कर सकते हैं। इसे डिजाइन करने के लिए खुद एक आर्किटेक्ट को काम पर रख लो, और मैं इसे आपके लिए बनवाऊँगी।
शैतान के पास कई संसाधन हैं। इस महिला के पास बहुत सारे संसाधन, बहुत सारा पैसा, बहुत सारे घर थे। एक दर्जन में से एक घर क्या है? एक घर, या दो या तीन घर, परमेश्वर के एक जन को खरीदने के लिए एक लाभ का सौदा होगा। इसलिए शैतान के नरम रुख से सावधान रहें।
दिलचस्प बात यह है कि जब मैं डेढ़ साल पहले इंग्लैंड गया था, तो मैंने उसे फिर से सड़क पर संयोग से देखा था। मुझे देखकर वह चौंक गई। और क्या आप जानते हैं कि उसने क्या किया? वह एक चतुर महिला है जो तेजी से सोचती है। उसका चेहरा तुरंत बदल गया और वह मुस्कुराई: "ओह, आप फिर से वापस आ गए हो। मैं आपको अपनी सभा में प्रचार करने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूँ।” मैंने कहा, "नहीं धन्यवाद।" (उसने एक प्रतिद्वंद्वी बैठक शुरू की थी, जिससे उसका बेटा, मेरा एक करीबी दोस्त, खुद अलग हो गया था और वह उससे कोइ भी ताल्लुक नहीं रखना चाहता था।)
"नहीं? लेकिन मैं आपको अपनी सभा में प्रचार करने के लिए आमंत्रित कर रही हूँ। क्या आप परमेश्वर के वचन के प्रचारक नहीं हैं? फिर मेरी सभा में आकर प्रचार करो।”
मैंने कहा "नहीं धन्यवाद" क्योंकि अगर मैंने उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया होता, तो वह कह पाती, "देखो, उसने मेरे सभा में प्रचार किया।"
उसी तरह, यदि यीशु शैतान की छल में आ गए होते, तो शैतान यह कह पाता, “यीशु ने जगत के राज्य मुझ से प्राप्त किए। मैं कुछ भी नहीं हूँ, लेकिन यह कभी मत भूलना कि उनहोंने सभी मुझसे प्राप्त किया है।" क्या आप शैतान की सूक्ष्म चाल को पहचान सकते हैं? जब उसे सहानुभूति होने लगे, तो बेहतर होगा कि आप चिंता करना शुरू कर दें। शैतान यीशु से कहता है, “तो तुम भूखे हो? परमेश्वर ने आपकी कितनी उपेक्षा की है! यदि आप परमेश्वर के पुत्र हैं, तो इस पत्थर को रोटी में बदल दो। चलो लड़ो मत, दोस्त बनें। मैं तुम्हें बदले में, इस छोटे से उपकार के लिए दुनिया के राज्यों को दूँगा। बस कुछ क्षणों के लिए मेरे सामने झुको, और तुम्हारे पास हमेशा के लिए राज्य होंगे। ”
शैतान को यीशु का उत्तर: सच्ची उपासना, परमेश्वर की सेवा करना है
यीशु व्यवस्थाविवरण ६:१३ को उद्धृत कर रहे हैं जब वे शैतान से कहते हैं, "लिखा है; कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को उपासना कर; और केवल उसी की सेवा कर।" (लूका ४:८) (You version)। यहाँ "सेवा", " उपासना" के समानांतर है। यीशु कह रहे हैं, "शैतान, तुम्हारा सिद्धांत गलत है। परमेश्वर की पूजा करने में परमेश्वर की सेवा करना शामिल है। तू परमेश्वर के सिवा किसी और की सेवा नहीं करेगा।”
यह परमेश्वर के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता की घोषणा भी है। पहले प्रलोभन में, यीशु ने पत्थर को रोटी में बदलने से इनकार करके अपने पिता के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। अब वे इसे फिर से साबित करते हैं`: "केवल उसी की सेवा करो।" किसी और की सेवा न करें! कोई समझौता नहीं! यीशु इस बात को इनकार नहीं करते कि शैतान दुनिया का राजा है, फिर भी वे यह भी कहते हैं, "मैं किसी और की नहीं, बल्कि परमेश्वर की सेवा करता हूँ।"
अंत में, शैतान की मूल युक्ति को हम ध्यान में रखें: "परमेश्वर ने जो कहा उसकी परवाह कौन करता है? क्या उन्होंने यह कहा भी है? अपना और अपनी भलाई का ध्यान रखको। अहंकार ही मायने रखता है। अपना खयाल रखना, क्योंकि हो सकता है कि परमेश्वर आपकी देखभाल हमेशा न करे।”
प्रलोभन के दूसरे सिद्धांत को ध्यान में रखें: आसान रास्ता अपनाएं। क्या आप परमेश्वर के मार्ग से शैतान का मार्ग बता सकते हैं?
१३ सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं। १४ क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं। (मैथ्यू ७:१३-१४)
प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करके, समझौता करने से इंकार करें। परमेश्वर और उनके वचन की आज्ञाकारिता में पूरी तरह से ह्रदय खोलें। शैतान के सूक्ष्म जाल में गिरने से बचने का यही एकमात्र पक्का तरीका है।
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